Zoho Hires without a Degree: ज्यादातर घरों में एक ही डर बार बार सुनाई देता है, अगर बच्चा डिग्री नहीं लेगा, तो जिंदगी कैसे चलेगी। लेकिन कल्पना कीजिए, कोई बड़ा टेक उद्यमी खुद आकर कहे कि “डिग्री नहीं, असली स्किल दिखाओ, नौकरी फिर भी मिलेगी।” यही काम किया है Zoho के फाउंडर श्रीधर वेम्बू ने। उनके बयान ने उन लाखों युवाओं और पैरेंट्स को नई उम्मीद दी है, जो मार्क्स और डिग्री की दौड़ में थक चुके हैं। Zoho के फाउंडर श्रीधर वेम्बू ने साफ कहा कि उनकी कंपनी बिना कॉलेज डिग्री वाले युवाओं को भी नौकरी देती है। उन्होंने पैरेंट्स को बच्चों पर डिग्री का दबाव छोड़कर स्किल और टैलेंट पर ध्यान देने की सलाह दी। जानिए पूरा नजरिया और इससे खुलने वाले करियर मौके।
Zoho का बड़ा फैसला डिग्री नहीं, स्किल ज़्यादा ज़रूरी
श्रीधर वेम्बू ने साफ शब्दों में कहा कि उनकी कंपनी Zoho सिर्फ कॉलेज डिग्री देखकर भर्ती नहीं करती, बल्कि असली टैलेंट और सीखने की क्षमता पर ध्यान देती है। उनके मुताबिक एक कागज़ की डिग्री से ज़्यादा अहम यह है कि कोई व्यक्ति काम को कितनी गहराई से समझता है और नई चीजें सीखने के लिए कितना तैयार है।
इसका मतलब यह हुआ कि अगर किसी युवा के पास कोडिंग, डिजाइन, सपोर्ट, सेल्स या किसी भी क्षेत्र की मजबूत स्किल है, तो सिर्फ डिग्री न होने की वजह से उसका सपना टूटना जरूरी नहीं। Zoho जैसे बड़े ब्रांड का ऐसा नजरिया भारतीय जॉब मार्केट में एक सकारात्मक बदलाव माना जा रहा है।
पैरेंट्स के लिए सीधी सलाह मार्क्स नहीं, टैलेंट पहचानें
भारतीय माता पिता को संदेश देते हुए वेम्बू ने कहा कि बच्चों पर सिर्फ मार्क्स और डिग्री का दबाव डालना ठीक नहीं है। अक्सर बच्चों को सिर्फ पढ़ाई याद करने और एग्जाम पास करने की मशीन की तरह तैयार किया जाता है, जबकि असली दुनिया में सफलता स्किल, प्रैक्टिकल नॉलेज और प्रॉब्लम सॉल्विंग से मिलती है।
उन्होंने यह भी कहा कि हर बच्चा यूनिवर्सिटी टॉपर नहीं बन सकता, लेकिन हर बच्चे के अंदर कोई न कोई खास टैलेंट जरूर होता है। पैरेंट्स का रोल है उस टैलेंट को समय रहते पहचानना और उसे सही दिशा देना, न कि तुलना और डांट से बच्चे का आत्मविश्वास तोड़ देना।
ग्राउंड लेवल काम गांवों से ग्लोबल प्रोफेशनल तक
अपनी X पोस्ट (पहले ट्विटर) के ज़रिए वेम्बू ने यह भी बताया कि Zoho ने भारत के कई छोटे कस्बों और गांवों से बच्चों को चुनकर उन्हें ट्रेनिंग दी है। कंपनी के “Zoho Schools of Learning” मॉडल के तहत 12वीं पास युवाओं को सीधे इंडस्ट्री स्किल सिखाई जाती है।
यहां स्टूडेंट को प्रैक्टिकल प्रोजेक्ट, रियल टाइम काम और मेंटरशिप के ज़रिए तैयार किया जाता है, और बाद में वही स्टूडेंट अच्छी सैलरी पर Zoho जैसी कंपनी में फुल टाइम रोल लेते हैं। यह मॉडल साबित करता है कि सही गाइडेंस और मेहनत से बिना डिग्री भी कोई वर्ल्ड क्लास प्रोफेशनल बन सकता है।
डिग्री नहीं, असली स्किल दिखाओ
टेक और डिजिटल इंडस्ट्री आज तेजी से बढ़ रही है। दुनिया भर की कई कंपनियां अब सिर्फ डिग्री के आधार पर नहीं, बल्कि स्किल टेस्ट, पोर्टफोलियो और इंटरव्यू के ज़रिए टैलेंट चुन रही हैं। Zoho की सोच भी इसी ट्रेंड से मेल खाती है। इसका फायदा खासकर उन युवाओं को मिलेगा, जो आर्थिक कारणों से महंगे कॉलेज में नहीं पढ़ पाए.
जिन्हें पढ़ाई से ज्यादा प्रैक्टिकल काम और प्रोजेक्ट करना पसंद है. जो खुद से ऑनलाइन सीख रहे हैं और छोटे छोटे प्रोजेक्ट बना रहे हैं . अगर वे सही स्किल बनाएं, अच्छा पोर्टफोलियो तैयार करें और सीखने की भूख बनाए रखें, तो उनके लिए भी अच्छे पैकेज और सम्मानजनक नौकरी के दरवाज़े खुल सकते हैं।
युवा अपने मन का टैलेंट पहचानें – कोडिंग, डिजाइन, मार्केटिंग, कंटेंट, सपोर्ट, जो भी अच्छा लगे . रोज थोड़ा समय स्किल सीखने में लगाएं – ऑनलाइन कोर्स, यूट्यूब, प्रैक्टिकल प्रोजेक्ट . छोटे छोटे प्रोजेक्ट बनाकर गिटहब, पोर्टफोलियो वेबसाइट या रिज्यूमे में जोड़ें . पैरेंट्स बच्चों को सुरक्षित माहौल दें, जहां वे गलती कर सकें, सीख सकें और आगे बढ़ सकें . इस तरह डिग्री हो या न हो, मेहनत और स्किल के दम पर करियर मजबूत बनाना संभव है।