Uttarakhand Pension Hike News: उत्तराखंड के 25वें स्थापना दिवस से पहले मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य आंदोलनकारियों के लिए पेंशन बढ़ाने, शहीदों का सम्मान करने और इंफ्रास्ट्रक्चर सुविधाओं के नामकरण जैसे बड़े ऐलान किए। इस साल उत्तराखंड ने 25 साल पूरे कर लिए हैं। इस बार का राज्य स्थापना दिवस खास रहा क्योंकि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आंदोलनकारियों के सम्मान में कई ऐतिहासिक घोषणाएं कीं। धामी सरकार ने उन सभी आंदोलनकारियों के प्रति आभार व्यक्त किया जिन्होंने उत्तराखंड के निर्माण के लिए लंबा संघर्ष किया। राजधानी देहरादून में आयोजित भव्य समारोह में मुख्यमंत्री ने कहा कि यह राज्य आंदोलनकारियों की मेहनत और बलिदान का परिणाम है कि आज हमारा उत्तराखंड देश के अग्रणी राज्यों में गिना जाता है।
उत्तराखंड के 25 साल पूरे होने पर मुख्यमंत्री ने कहा कि अब राज्य को आत्मनिर्भर बनाना हमारी जिम्मेदारी है। उन्होंने बताया कि सरकार रोजगार, शिक्षा, पर्यटन, और औद्योगिक विकास के क्षेत्र में नए अवसर तैयार कर रही है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि आने वाले सालों में सरकार ऐसे कई फैसले लेगी जो राज्य के युवाओं और किसानों को सशक्त बनाएंगे। इस मौके पर उन्होंने कहा कि जब हर नागरिक अपने हिस्से का दीप जलाएगा, तब उत्तराखंड में उजाला और उम्मीद दोनों बढ़ेंगे।
Uttarakhand Pension Hike for agitators
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री धामी ने सबसे बड़ी घोषणा की कि राज्य आंदोलन में जेल गए या घायल हुए आंदोलनकारियों की मासिक पेंशन 6,000 रुपये से बढ़ाकर 7,000 रुपये कर दी जाएगी। उन्होंने बताया कि जो आंदोलनकारी इस श्रेणी से अलग हैं, उनकी पेंशन अब 4,500 रुपये से बढ़कर 5,500 रुपये प्रतिमाह होगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जो आंदोलनकारी आंदोलन के दौरान चोटिल होकर पूरी तरह अशक्त हो चुके हैं, उनकी पेंशन अब 20,000 रुपये से बढ़ाकर 30,000 रुपये प्रति माह की जाएगी। इसके साथ ही उनकी देखभाल के लिए एक मेडिकल अटेंडेंट की व्यवस्था सरकार की ओर से की जाएगी। सबसे भावुक पल तब आया जब मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि आंदोलन के दौरान शहीद हुए आंदोलनकारियों के परिवारों की पेंशन भी अब 3,000 रुपये से बढ़ाकर 5,500 रुपये प्रतिमाह दी जाएगी। इस घोषणा ने वहाँ मौजूद परिवारों की आँखों में खुशी के आँसू ला दिए।
मुख्यमंत्री धामी का संदेश साफ था कि यह राज्य आंदोलनकारियों की नींव पर खड़ा हुआ है और उनके त्याग को कभी भुलाया नहीं जा सकता। उनका कहना था कि हर उत्तराखंडवासी को यह दिन गर्व और कृतज्ञता के रूप में मनाना चाहिए। लोगों ने इस राज्य स्थापना वर्ष को दीपों, गीतों और जयघोष के साथ मनाया। सड़कों पर रंगोली बनी, घरों में दीए जले और बच्चों ने स्कूलों में उत्तराखंड की वीरता की कहानियां सुनीं।
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शहीदों को समर्पित नामकरण और सम्मान
मुख्यमंत्री ने कहा कि अब उन शहीद आंदोलनकारियों के नाम पर उनके क्षेत्र की प्रमुख इंफ्रास्ट्रक्चर सुविधाओं का नामकरण किया जाएगा। यह कदम उन लोगों के सम्मान में है जिन्होंने राज्य के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया। कार्यक्रम के दौरान कचहरी परिसर स्थित शहीद स्थल पर मुख्यमंत्री ने पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। इसके बाद उन्होंने पुलिस लाइन में राज्य आंदोलनकारियों और शहीदों के परिजनों को सम्मानित किया। इस अवसर पर हेलीकॉप्टर से फूल बरसाकर आंदोलनकारियों का अभिनंदन किया गया। धामी ने प्रदेशवासियों से अपील की कि वे राज्य स्थापना दिवस पर अपने घरों में पांच दीपक जलाएं ताकि सभी मिलकर उन आंदोलनकारियों को याद कर सकें जिनकी वजह से उत्तराखंड का यह गौरवशाली इतिहास बना।
आवेदनों के निस्तारण और स्मारक सौंदर्यीकरण की घोषणा
मुख्यमंत्री ने यह भी घोषणा की कि वर्ष 2021 तक जिलाधिकारी कार्यालय में लंबित आंदोलनकारियों के आवेदन पत्रों के निस्तारण के लिए छह महीने का समय विस्तार दिया जाएगा। साथ ही, राज्य के सभी शहीद स्मारकों का सौंदर्यीकरण भी कराया जाएगा ताकि आने वाली पीढ़ियां इन स्थलों से प्रेरणा ले सकें। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ सरकारी घोषणा नहीं है बल्कि एक सामाजिक संकल्प है कि उत्तराखंड अपने वीर सेनानियों को कभी भूल नहीं सकता।
इन घोषणाओं के बाद पूरे राज्य में खुशी की लहर दौड़ गई। देहरादून, नैनीताल, हरिद्वार और टिहरी जैसे जिलों में लोगों ने मुख्यमंत्री के फैसले का स्वागत किया। कई आंदोलनकारी परिवारों ने कहा कि यह उनके बलिदान की सच्ची पहचान है। आन्दोलनकारी पार्वती देवी ने मीडिया से बातचीत में कहा कि यह हमारे दिल को छू जाने वाला पल है। इतने वर्षों बाद भी सरकार हमारे दर्द को समझ रही है। वहीं युवाओं ने कहा कि यह कदम नई पीढ़ी को अपने राज्य के इतिहास से जोड़ने का माध्यम बनेगा।
राज्य के विभिन्न राजनीतिक दलों ने भी इस घोषणा की सराहना की। विपक्ष के नेताओं ने कहा कि राज्य आंदोलनकारियों का सम्मान सभी दलों से ऊपर है। सामाजिक संगठनों ने इसे एक सकारात्मक पहल बताया जिसने समाज में एकता और गर्व की भावना को मजबूत किया है। Twitter और Facebook पर लोगों ने सीएम धामी के इस कदम को भावनात्मक और प्रेरणादायक बताया। सोशल मीडिया पर #UttarakhandDiwas और #AndolankariPension बढ़ोतरी ट्रेंड करता रहा।