Outsource Employees Salary Hike News: उत्तर प्रदेश में आउटसोर्स सेवा निगम बनाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। निगम बनने के बाद चार लाख से अधिक आउटसोर्स कर्मचारियों की न्यूनतम सैलरी ₹20000 तय होगी और अधिकतम ₹40000 तक मिलेगी। उत्तर प्रदेश में लाखों आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए आखिरकार एक खुशखबरी आई है। लंबे इंतजार के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार ने आउटसोर्स कर्मचारियों के कल्याण के लिए नया कदम उठाया है।
अब प्रदेश में आउटसोर्स सेवा निगम के गठन को मंजूरी मिल चुकी है। इस फैसले का असर सीधे चार लाख से अधिक कर्मचारियों पर पड़ेगा, जो अब बेहतर वेतन और सुविधाओं के हकदार होंगे। सरकार के मुताबिक, कर्मचारियों को न्यूनतम ₹20000 और अधिकतम ₹40000 तक का मानदेय मिलेगा। इसके साथ ही छुट्टी, बीमा और मेडिकल सुविधा जैसी कई अन्य योजनाएं भी लागू होंगी।
गौर करने वाली बात यह है कि इस निगम के गठन की मंजूरी तो करीब दो महीने पहले ही कैबिनेट में दी जा चुकी थी, लेकिन अब तक यह प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी है। सचिवालय प्रशासन विभाग का कहना है कि अब कंपनी अधिनियम के अंतर्गत इसका पंजीकरण कराया जा रहा है। इस निगम को पब्लिक लिमिटेड और गैर-लाभकारी संस्था के रूप में स्थापित किया जाएगा।
जैसे ही यह निगम रजिस्टर्ड होगा, कर्मचारियों के मानदेय और सुविधाओं का लाभ तुरंत शुरू कर दिया जाएगा।
योगी कैबिनेट ने दी थी मंजूरी
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में 2 सितंबर 2025 को हुई कैबिनेट बैठक में आउटसोर्स सेवा निगम के गठन का प्रस्ताव पारित किया गया था। इसके बाद 20 सितंबर को शासनादेश जारी करते हुए कहा गया था कि निगम दो महीने के भीतर बना लिया जाएगा। अब उस अवधि के पूरा होते हुए भी निगम का गठन अधर में लटका है, लेकिन सरकार ने सभी औपचारिकताएं पूरी करने की बात कही है। सचिवालय प्रशासन विभाग ने बताया कि अब कंपनी एक्ट में रजिस्ट्री होने के बाद निगम औपचारिक रूप से काम करना शुरू कर देगा।
प्रदेश में वर्तमान में 4 लाख से अधिक लोग आउटसोर्स के माध्यम से विभिन्न विभागों में कार्यरत हैं। इनमें डेटा एंट्री ऑपरेटर से लेकर ड्राइवर, ऑफिस असिस्टेंट, गार्ड, हेल्पर और अन्य कर्मचारी शामिल हैं। वर्षों से ये कर्मचारी निजी ठेकेदारों के माध्यम से काम कर रहे थे, जिनमें से अधिकांश को उचित वेतन और समय पर भुगतान नहीं मिलता था। कई बार इन कर्मचारियों को महीने के अंत में भी वेतन के लिए इंतजार करना पड़ता था। नई व्यवस्था बनने के बाद इन कर्मचारियों को एक समान वेतन, समय पर भुगतान और पारदर्शिता का पूरा लाभ मिलेगा।
आउटसोर्स सेवा निगम क्यों जरूरी
राज्य सरकार के मुताबिक, आउटसोर्स सेवा निगम के गठन का सबसे बड़ा उद्देश्य कर्मचारियों को शोषण से मुक्त कराना है। ठेकेदारों के माध्यम से नियुक्त कर्मचारियों को अक्सर वेतन में कटौती, देरी और अनुचित कामकाज की समस्या झेलनी पड़ती थी।अब जब यह निगम बन जाएगा तो सभी नियुक्तियां निगम के माध्यम से होंगी। वेतन भी सीधे कर्मचारी के खाते में जाएगा।
कंपनी किसी प्राइवेट ठेकेदार के स्थान पर सरकार और कर्मचारी के बीच की मध्यस्थ बनेगी। इससे न केवल आर्थिक पारदर्शिता बढ़ेगी बल्कि हर कर्मचारी के अधिकार भी सुरक्षित रहेंगे।
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किस तरह मिलेगी वेतन वृद्धि
सरकारी प्रस्ताव में बताया गया है कि निगम बनने के बाद कर्मचारियों के लिए चार श्रेणियों में वेतन तय किया जाएगा श्रेणी 1: न्यूनतम ₹20000 प्रतिमाह, श्रेणी 2: ₹25000 प्रतिमाह, श्रेणी 3: ₹30000 प्रतिमाह, श्रेणी 4: ₹40000 प्रतिमाह. इस व्यवस्था से अब हर आउटसोर्स कर्मचारी को निश्चित और बेहतर आय मिल सकेगी। वेतन के साथ छुट्टी, बीमा और स्वास्थ्य लाभ जैसी सुविधाएं भी जोड़ी जाएंगी।
मानदेय का भुगतान
सरकार ने यह निर्देश दिया है कि सभी कर्मचारियों को हर महीने की 5 तारीख तक मानदेय का भुगतान कर दिया जाए। इससे वेतन में हो रही देरी की शिकायतें स्वतः खत्म हो जाएंगी। साथ ही कर्मचारियों के लिए अवकाश व्यवस्था, आकस्मिक अवकाश और मातृत्व अवकाश जैसी सुविधाएं भी जोड़ी जा रही हैं।
योगी आदित्यनाथ सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में कर्मचारियों के हित में कई फैसले लिए हैं। चाहे वह सफाई कर्मचारियों का वेतन बढ़ाना हो, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए भत्ता जोड़ना हो या अब आउटसोर्स कर्मचारियों को न्यूनतम वेतन की सुरक्षा देना — हर कदम श्रमिक वर्ग की मजबूती की दिशा में है। सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री स्वयं निगम के गठन की प्रगति की समीक्षा कर रहे हैं। जैसे ही कंपनी पंजीकृत होगी, अगली कैबिनेट बैठक में इसके संचालन के नियमावली को मंजूरी दी जाएगी।
प्रशासनिक स्तर पर मिल रही जानकारी के अनुसार, नवंबर 2025 तक निगम के पंजीकरण की प्रक्रिया पूरी होने की संभावना है।
एक बार निगम शुरू होते ही कर्मचारियों को बढ़ी हुई सैलरी और नई सुविधाओं का लाभ मिलना शुरू हो जाएगा। इससे राज्य के हजारों आउटसोर्स कर्मचारी जो महीनों से बेहतर वेतन का इंतजार कर रहे थे, उनकी उम्मीदें पूरी होंगी।
कर्मचारियों को मिलेंगी ये सुविधाएं
निगम बनने के बाद कर्मचारियों को केवल सैलरी ही नहीं, बल्कि कई कल्याणकारी लाभ भी मिलने वाले हैं। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं हर महीने तय समय पर मानदेय भुगतान। वार्षिक अवकाश और आकस्मिक छुट्टियां। मेडिकल और स्वास्थ्य बीमा सुविधाएं. मातृत्व और चिकित्सकीय अवकाश। ट्रांसफर और प्रमोशन की पारदर्शी नीति। डिजिटल उपस्थिति और ई-प्रबंधन प्रणाली। इन सुविधाओं के शुरू होने से प्रदेश के लाखों कर्मचारियों के कार्य और जीवन दोनों में राहत आएगी।
कंपनी एक्ट में पंजीकरण की प्रक्रिया
मुख्य सचिवालय प्रशासन विभाग के प्रमुख सचिव मनीष चौहान ने बताया है कि कंपनी एक्ट के तहत सभी दस्तावेजों की तैयारी पूरी हो चुकी है। अब निगम का रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया में है। रजिस्ट्रेशन के बाद सबसे पहले महानिदेशक की नियुक्ति की जाएगी जो इस निगम का संचालन संभालेंगे। उनके अधीन एक सलाहकार समिति और तकनीकी टीम भी बनाई जाएगी। यह टीम कर्मचारियों की नियुक्ति, वेतन भुगतान और सुविधाओं के बेहतर कार्यान्वयन पर ध्यान देगी।
राज्य सरकार ने यह तय किया है कि आउटसोर्स सेवा निगम को एक “गैर-लाभकारी” संस्था के रूप में संचालित किया जाएगा।
इसका मतलब होगा कि निगम किसी भी तरह का मुनाफा नहीं कमाएगा। यह पूरी तरह से कर्मचारी सुविधाओं और सेवा कार्यों पर केंद्रित रहेगा। इसके तहत सरकार का उद्देश्य है कि हर कर्मचारियों को उसकी मेहनत के बराबर हक मिले।
निगम बनने के बाद आउटसोर्स कर्मचारियों के अलावा नई नियुक्तियों की प्रक्रिया भी शुरू होगी। विभागों में रिक्त पदों को निगम के माध्यम से भरा जाएगा। इससे नौजवानों के लिए नौकरियों के नए अवसर खुलेंगे। प्रदेश सरकार का लक्ष्य है कि दिसंबर के अंत तक निगम गठन पूरा कर लिया जाए और जनवरी से नई भर्ती प्रक्रिया शुरू हो जाए।
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भविष्य में क्या बदलाव हो सकते हैं?
विशेषज्ञों का मानना है कि निगम बनने के बाद भविष्य में कर्मचारियों की ग्रेड व्यवस्था भी जोड़ी जा सकती है। समय के साथ वेतन बढ़ोतरी, बोनस और प्रोत्साहन नीति भी लागू की जाएगी। इसके तहत योग्य और पुराने कर्मचारियों के लिए स्थायी नियुक्ति का रास्ता भी खुल सकता है। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा आउटसोर्स सेवा निगम का गठन कर्मचारियों के लिए एक ऐतिहासिक कदम है। इससे जहां चार लाख से अधिक परिवार आर्थिक सुरक्षा की ओर बढ़ेंगे, वहीं प्रदेश में कार्य संस्कृति भी बदलेगी। कर्मचारियों को अब ₹20000 से ₹40000 तक का मानदेय, समय पर वेतन और स्वास्थ्य सेवाओं जैसी कई सुविधाएं मिलेंगी।
यह पूरी पहल योगी सरकार की उस सोच को दर्शाती है जिसमें हर मेहनतकश व्यक्ति को उसका हक मिलना चाहिए। अब उम्मीद है कि नवंबर के अंत तक निगम का गठन हो जाएगा और दिसंबर से बढ़ी हुई सैलरी का लाभ कर्मचारियों के खाते में पहुंचने लगेगा। यह सिर्फ एक योजना नहीं बल्कि हजारों श्रमिकों के लिए नई सुबह की शुरुआत है। प्रदेश के विकास में योगदान देने वाले कर्मचारियों के लिए यह सच्चे मायनों में राहत और सम्मान दोनों लेकर आया है।