New Pension Rule Implemented: Submission of Separate Life Certificate for Parents Now Mandatory

New Pension Rule: केंद्र सरकार ने नई पेंशन नियम जारी किए हैं। अब दिवंगत सरकारी कर्मचारियों के माता-पिता को हर साल अलग-अलग जीवन प्रमाणपत्र देना होगा ताकि उन्हें उच्च दर पर पारिवारिक पेंशन मिलती रहे। देश के लाखों पेंशन धारकों के लिए केंद्रीय सरकार की ओर से एक अहम सूचना आई है। अब उन माता-पिता को जो अपने बेटे या बेटी यानी दिवंगत सरकारी कर्मचारी की पारिवारिक पेंशन प्राप्त कर रहे हैं, हर साल अलग-अलग जीवन प्रमाणपत्र देना अनिवार्य हो गया है। केंद्र सरकार के कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय के तहत आने वाले Department of Pension & Pensioners’ Welfare (DoPPW) ने यह नया नियम जारी किया है। यह प्रावधान CCS (EOP) Rules 1939/2023 के तहत किया गया है। सरकार का कहना है कि यह बदलाव पारदर्शिता बढ़ाने और ओवरपेमेंट (अधिक भुगतान) को रोकने के लिए लाया गया है।

क्या है नया पेंशन नियम?

पहले तक पेंशन पाने वाले माता-पिता को किसी प्रकार का जीवन प्रमाणपत्र जमा नहीं करना पड़ता था। परिवार पेंशन उसी दर पर जारी रहती थी, भले ही दोनों में से एक अभिभावक का निधन हो चुका हो। लेकिन अब नियम में संशोधन किया गया है। नए नियम के अनुसार, जिन भी माता-पिता को अपने मृत सरकारी कर्मचारी बेटे या बेटी की पारिवारिक पेंशन मिलती है, उन्हें हर साल अलग-अलग जीवन प्रमाणपत्र (Life Certificate) देना होगा। इससे यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि अगर किसी एक माता-पिता का निधन हो जाए तो पेंशन की राशि उसी हिसाब से घटाई जा सके।

दोनों माता-पिता को देना होगा अलग प्रमाण

पहले एक ही जीवन प्रमाणपत्र परिवार के नाम पर पर्याप्त माना जाता था। लेकिन नए नियम के तहत अब यह अनिवार्य किया गया है कि पिता और माता दोनों को स्वतंत्र रूप से यह प्रमाणपत्र देना होगा। इसका उद्देश्य यह है कि यदि एक माता-पिता का निधन हो जाता है, तो दूसरा अभिभावक सही दर पर शेष पेंशन प्राप्त कर सके।

Department of Pension & Pensioners’ Welfare का कहना है कि यह कदम पारिवारिक पेंशन प्रणाली को और अधिक पारदर्शी और निष्पक्ष बनाएगा। कई बार ऐसा होता था कि एक अभिभावक के निधन के बाद भी संस्थान को इसकी जानकारी नहीं हो पाती थी। इससे अनजाने में अधिक भुगतान हो जाता था, जिसे बाद में रिकवर करना मुश्किल होता था। अब अलग-अलग जीवन प्रमाणपत्र देने से यह स्थिति नहीं आएगी और सरकार समय पर पेंशन का समायोजन कर सकेगी।

परिवार पेंशन में नया अनुपात तय

सरकार ने साफ किया है कि नई व्यवस्था Rule 12(5) के तहत लागू होगी। अगर दोनों माता-पिता जीवित हैं तो परिवार को पेंशन का 75 प्रतिशत हिस्सा दिया जाएगा। यदि केवल एक माता-पिता जीवित है तो उसे पेंशन का 60 प्रतिशत हिस्सा मिलेगा। यानी पहले जहां कई मामलों में दोनों की मृत्यु की सूचना समय पर न पहुंचने के कारण पूरा 75 प्रतिशत पेंशन जारी रहता था, अब उस समस्या का समाधान हो जाएगा।

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जीवन प्रमाणपत्र कैसे जमा करें?

माता-पिता को हर वर्ष नवंबर के महीने में जीवन प्रमाणपत्र देना होगा। इसके लिए कई सुविधाजनक विकल्प सरकार की ओर से पहले से ही जारी हैं। Jeevan Pramaan Portal, Umang App, DLC (Digital Life Certificate), नजदीकी बैंक शाखा या Common Service Centre (CSC). इन माध्यमों के ज़रिए अभिभावक घर बैठे भी अपना जीवन प्रमाणपत्र डिजिटल रूप में जमा कर सकते हैं।

अब जीवन प्रमाणपत्र देने के लिए लंबी लाइन में लगने की जरूरत नहीं है। डिजिटल प्लेटफॉर्म जैसे Jeevan Pramaan और Umang App के जरिए इसे घर बैठे जमा किया जा सकता है। माता-पिता को केवल आधार कार्ड और बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन की जरूरत होती है। यह प्रमाणपत्र 12 महीने तक वैध रहेगा और इसके नवीनीकरण की याद दिलाने के लिए एप की ओर से सूचना भी दी जाएगी।

केंद्र सरकार ने यह भी सुनिश्चित किया है कि वरिष्ठ नागरिकों के लिए जीवन प्रमाणपत्र देने में किसी कठिनाई का सामना न करना पड़े। इसके लिए बैंकों, डाकघरों और डिजिटल सेवा केंद्रों में विशेष काउंटर बनाए जाएंगे। इसके अलावा, घर बैठे प्रमाणपत्र जमा करने की सुविधा भी दी जा रही है जिसकी मदद से माता-पिता (जिनको चलने-फिरने में कठिनाई होती है) आसानी से पेंशन जारी रख सकेंगे।

सरकार का बयान

Department of Pension & Pensioners’ Welfare के संयुक्त सचिव ने कहा कि नई व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य “मानवता और पारदर्शिता दोनों को संतुलित तरीके से लागू करना” है। इस नियम के तहत परिवार को पेंशन काटने का डर नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित किया गया है कि राशि सही पात्र व्यक्ति को मिले। उन्होंने कहा, “कई वर्षों से ऐसे मामले सामने आ रहे थे जहां दोनों अभिभावकों के नाम पर लगातार पूरी पेंशन जारी थी, जबकि एक अभिभावक का निधन हो चुका था। इससे ओवरपेमेंट हो जाता था। अब यह स्थिति पूरी तरह खत्म होगी।”

यह नियम किनपर होगा लागू?

यह नियम उन माताओं और पिताओं पर लागू होगा जो अपने पुत्र या पुत्री, जो केंद्र सरकार के मृत कर्मचारी थे, की पारिवारिक पेंशन प्राप्त कर रहे हैं। यदि मृत कर्मचारी का जीवनसाथी या बच्चा जीवित नहीं है, तो माता-पिता पात्र व्यक्ति माने जाते हैं। यह परिवर्तन केंद्र सरकार के सभी विभागों और संबद्ध संगठनों पर लागू होगा। राज्य सरकारें भी चाहें तो इसे अपने स्तर पर अपनाने पर विचार कर सकती हैं।

क्या होगा अगर प्रमाणपत्र जमा नहीं किया गया

जो भी माता-पिता जीवन प्रमाणपत्र जमा नहीं करेंगे, उनकी पेंशन अस्थायी रूप से रोक दी जाएगी जब तक कि प्रमाणपत्र प्राप्त न हो। प्रमाणपत्र आने पर पेंशन पुनः शुरू हो जाएगी और लंबित महीनों की राशि भी दी जाएगी। सरकार ने इसे कड़े नियम के रूप में नहीं बल्कि एक नियमित प्रक्रिया के रूप में पेश किया है।

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पेंशन दर पहले से तय

सरकार ने स्पष्ट किया है कि पेंशन की दर किसी अन्य आय पर निर्भर नहीं करेगी। माता-पिता को यह पेंशन केवल कर्मचारी की सेवा अवधि और उसके पात्र पद के आधार पर मिलेगी। नई व्यवस्था के मुताबिक दोनों माता-पिता के जीवित रहने पर 75 प्रतिशत पारिवारिक पेंशन मिलेगी। एक के निधन पर 60 प्रतिशत पेंशन दी जाएगी। इस अनुपात से हर साल करोड़ों रुपये की बचत होगी और धन सही लाभार्थियों तक पहुंचेगा।

केंद्र सरकार का यह बदलाव प्रणाली को पारदर्शी बनाएगा। अब पेंशन के हर भुगतान से पहले जीवन प्रमाणपत्र के माध्यम से लाभार्थी की पहचान सत्यापित की जाएगी। डिजिटल जीवन प्रमाणपत्र (DLC) की मदद से यह प्रक्रिया कुछ ही मिनटों में पूरी हो जाएगी। इससे न केवल किसी भी प्रकार की त्रुटि रुकेगी, बल्कि वृद्ध अभिभावकों के लिए सुविधा भी बढ़ेगी।

पेंशन नियमों में पहले हुए बदलाव

पेंशन प्रणाली में यह अकेला बड़ा बदलाव नहीं है। इससे पहले भी सरकार ने वरिष्ठ नागरिकों के लिए कुछ राहत भरे निर्णय लिए हैं, जैसे नवंबर से पहले जीवन प्रमाणपत्र जमा करना अनिवार्य नहीं होगा। पेंशन को डिजिटल रूप में ट्रैक करने की सुविधा मिलेगी। पेंशन फाइलिंग के लिए विदेशी बैंक खातों की स्वीकृति। इन सभी बदलावों का उद्देश्य यह है कि पेंशनधारकों को बिना परेशानी उनका अधिकार समय पर मिल सके।

भविष्य में और भी सुधार संभव

केंद्र सरकार ने संकेत दिया है कि भविष्य में समग्र पेंशन प्लेटफॉर्म तैयार किया जा रहा है जहां परिवार के सदस्य किसी भी बदलाव की सूचना ऑनलाइन दर्ज कर सकेंगे। इससे पेंशन प्रशासन और भी सरल और ऑटोमेटेड हो जाएगा। इसके अलावा बुजुर्गों को उनके मोबाइल नंबर पर जीवन प्रमाणपत्र जमा करने की याद दिलाने का नोटिफिकेशन भी भेजा जाएगा। केंद्र सरकार का यह नया पेंशन नियम समय की जरूरत के मुताबिक उठाया गया कदम है। यह न केवल सरकारी धन की सुरक्षा करेगा बल्कि यह भी सुनिश्चित करेगा कि पेंशन का भुगतान सही व्यक्ति को मिले।

ब माता-पिता को अलग-अलग जीवन प्रमाणपत्र देना आसान और सुरक्षित दोनों होगा क्योंकि पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन उपलब्ध है।
इससे वृद्धजनों को न केवल सुविधा मिलेगी बल्कि परिवार पेंशन की प्रणाली और भी विश्वसनीय बनेगी। इस नई व्यवस्था के साथ सरकार ने यह संकेत दिया है कि आगे भी पेंशनरों के हित में पारदर्शी और आधुनिक बदलाव जारी रहेंगे। यह निर्णय सरकार की उस नीति को दर्शाता है जो कहती है — पारदर्शिता के साथ भरोसा, और हर वरिष्ठ नागरिक को उसका हक समय पर।

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